PFWS Vice President's Message Dr. Sushi Singh

नजर बदलिए, नजारे बदल जायेंगे, सोच बदलिए, सितारे बदल जायेंगे | कशती नाखुदा को बदलने की जरुरत नहीं, दिशा बदलिए, किनारे बदल जायेंगे |

सबसे पहले मैं PFWS Mission Olympics में चुने गए बच्चों और उनके अभिभावकों को हार्दिक बधाई देना चाहूंगी जिनके लिए हमने इस एक बड़े सपने को साकार करने की छोटी सी कोशिश की है |

पुलिस परिवारों में खासकर सीमित आय वर्ग के लोगो की सोच एवं नजर खेलों के प्रति बदलने के लिए मिशन ओलंपिक्स – 2017 / 2020 को वैचारिक रूप दिया गया है | कहते हैं निर्धनता सोच एवं संकीर्ण मानसिकता प्रतिभा को खा जाती है, निगल जाती है | सोच, संसाधन एवं संकीर्ण मानसिकता को दूर करने के लिए ही पुलिस परिवार कल्याण समिति ने बच्चों / लड़कों / लड़कियों कि प्रतिभा पहचान कर उनको राष्ट्रीय स्टार पर खेल के लिए तैयार करने की पहल मिशन ओलंपिक्स में की गयी है |

हम जानते हैं कि हमारे पुलिसकर्मियों के बच्चों को परिवार वाले समय, प्रोत्साहन, प्रशिक्षण नहीं दे पाते हैं | यह समिति प्रतिभाशाली खिलाडियों को इन तीन चीजों को मुहैया करने का प्रयास कर रही है | मिशन ओलंपिक्स के प्रथम चरण में हमने प्रतिभशाली बच्चों को खोजा है | इस मिशन के द्वितीय चरण में इन बच्चों को निजी क्षेत्र द्वारा निगम सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility) के तहत जरुरी प्रशिक्षण, प्रशिक्षक संसाधन मुहैया कराये जायेंगे। भारतीय खेल प्राधिकरण सरकार की अन्य एजेन्सियां एवं लोकक्षेत्र के कई संसाधन हमारे बच्चों को मिशन ओलम्पिक के चरण-2 में सहयोग देने के लिए आगे आए हैं। हम चयनीत प्रतियोगियों की प्रोफाइलिंग, निरंतर, पोषणिय मार्गदर्शन, फिजियोंथैरेपिस्ट (भौतिक चिकित्सक) द्वारा आवधिक निगरानी के द्वारा एक साल का औपचारिक प्रशिक्षण देंगे। इसमें पांच खेल शामिल हैं, एथेलेटिक्स, शूटिंग, बैङमिंटन, फुटबाल एँव कुश्ती।

यह एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पहल है। जिसके माध्यम से हम संसाधन, आधारभूत संरचना एवं प्रशिक्षण का एक बेडा खडा कर लेंगे। जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट खिलाङी बनायेंगे जो ओलम्पिक में भी भारत के प्रदर्शन को सुधारेंगे।

इस विचारधारा को धरातल पर लाने के लिए समिति की अध्यक्षा श्रीमती सूचना पटनायक, दिल्ली पुलिस उपायुक्त- श्री अमूल्य पटनायक, समिति के सदस्यों एवं पुलिस परिवार के सभी सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित करना चाहती हूँ जिन्होंनें अपने बच्चों को इस मिशन में भेजा है। अत: मैं यह कहना चाहती हूँ कि-

मैं अकेली ही चली थी जानिबे मंजिल, मगर लोग आते गये और काफिला बनता गया।

धन्यवाद।